बिहार में इस बार सर्दी ने ऐसा रंग दिखाया है कि कड़ाके की ठंड और घना कोहरा आम जिंदगी को ठप कर रहा है। तापमान डिप्रेशन में चला गया है, खासकर छोटे बच्चों के लिए स्कूल जाना खतरनाक साबित हो रहा। जिलाधिकारियों ने कम उम्र के छात्रों की सेहत को ध्यान में रखते हुए प्राइमरी से आठवीं क्लास तक के स्कूलों को 4 जनवरी तक बंद करने का फैसला किया है। यह कदम भीषण शीतलहर से निपटने के लिए उठाया गया, ताकि बच्चे सुरक्षित रहें।

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क्यों बढ़ीं स्कूल छुट्टियां?
सर्दियों का मौसम आते ही बिहार के कई इलाकों में तापमान जमाव बिंदु के करीब पहुंच गया। सुबह की बर्फीली हवाएं और घना कोहरा सड़कों पर विजिबिलिटी को कम कर रहे हैं, जिससे स्कूल आने-जाने में खतरा बढ़ गया। प्रशासन ने स्थानीय मौसम की स्थिति का आकलन किया और पाया कि छोटे बच्चों के लिए क्लासरूम पहुंचना मुश्किल है। इसलिए डीएम स्तर पर सख्त निर्देश जारी हुए, जिसमें प्री-स्कूल, आंगनबाड़ी सेंटर और निचली कक्षाओं को अवकाश दे दिया गया। यह फैसला बच्चों की जान बचाने के लिहाज से जरूरी था, क्योंकि ठंड से संबंधित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।
किन जिलों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?
राज्य के पूर्वांचल और मध्य भागों में ठंड ने सबसे ज्यादा तंग किया। लखीसराय जैसे जिलों में डीएम ने पूरे जिले के स्कूलों को लंबे ब्रेक पर भेज दिया। पटना में भी यही हाल है, जहां शहरी इलाकों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल प्रभावित हुए। सारण जिले में स्थानीय प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद रखने का ऐलान किया। मुंगेर समेत अन्य जिलों में भी तापमान 7 डिग्री से नीचे गिरने के कारण यही फैसला लिया गया। इन इलाकों में कोहरे की वजह से ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया था। अभिभावक अब राहत की सांस ले रहे हैं, क्योंकि बच्चे घर पर ही पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
ऊपरी कक्षाओं के लिए क्या नियम?
निचली कक्षाओं को छुट्टी मिलने का मतलब यह नहीं कि पूरी पढ़ाई रुक गई। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए समय-सारणी में बदलाव किया गया। क्लास अब सुबह 10 बजे से शुरू होंगी और दोपहर 3:30 बजे तक ही चलेंगी। बोर्ड परीक्षाओं या प्री-बोर्ड की तैयारी वाले स्पेशल बैचों को पूरी छूट दी गई है। शिक्षकों को निर्देश हैं कि वे सावधानियां बरतें, जैसे क्लासरूम में हीटर की व्यवस्था और मास्क का इस्तेमाल। इससे पढ़ाई का लय बना रहेगा, लेकिन स्वास्थ्य जोखिम कम होगा।
ठंड से बचाव के आसान उपाय
यह शीतलहर लंबे समय तक बनी रह सकती है, इसलिए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी हैं। बच्चों को गर्म कपड़े, दस्ताने और टोपी पहनाएं। घर पर हल्का व्यायाम और गर्मागर्म भोजन दें, जैसे अदरक वाली चाय या सूप। बाहर निकलते समय कोहरे में हेडलाइट ऑन रखें और स्पीड सीमित करें। मौसम विभाग की अपडेट पर नजर रखें, क्योंकि तापमान में और गिरावट आ सकती है। अभिभावक इस दौरान बच्चों को ऑनलाइन स्टडी या होमवर्क पर फोकस करने को कहें, ताकि ब्रेक के बावजूद बैकलॉग न बने।
आगे क्या होगा स्कूलों का?
प्रशासन लगातार मौसम की निगरानी कर रहा है। जैसे ही तापमान सामान्य होगा, स्कूल पूरी क्षमता से खुल जाएंगे। तब तक अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों की देखभाल सुनिश्चित करें। यह फैसला न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए सही है, बल्कि जागरूकता भी फैला रहा कि प्रकृति के आगे झुकना कभी कमजोरी नहीं। बिहार के लाखों छात्र अब घर के आंगन में ही सर्दी का मजा ले रहे हैं।
















