उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर से हरियाणा के पानीपत तक फैला यह विशालकाय एक्सप्रेसवे अब हकीकत बनने को तैयार है। हाल ही में केंद्र सरकार ने इस 747 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी है, जो पूर्वांचल को दिल्ली-एनसीआर के इंडस्ट्रियल हब से जोड़ेगा। यात्रा का समय घटकर महज कुछ घंटों में सिमट जाएगा, जिससे व्यापार और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। प्रभावित इलाकों में किसानों और निवेशकों की किस्मत चमकने लगी है, क्योंकि जमीन के भाव चार गुना तक उछल चुके हैं।

Table of Contents
प्रोजेक्ट की भव्य योजना
यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर से शुरू होकर बस्ती मंडल के कई जिलों को पार करते हुए हरियाणा पहुंचेगा। सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर और कुशीनागर जैसे क्षेत्रों से गुजरते हुए यह करीब 133 गांवों को छुएगा। कुल लंबाई में से यूपी हिस्सा सबसे बड़ा होगा, जहां सड़क की चौड़ाई 120 मीटर तक होगी। निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत धक्का लगेगा। पूर्वी यूपी की कृषि उपज अब तेजी से बाजारों तक पहुंच सकेगी, खासकर नेपाल सीमा से सटे इलाकों से।
जमीन बाजार में हड़बड़ी
एक्सप्रेसवे की घोषणा के बाद प्रभावित गांवों की कृषि भूमि के दामों ने रफ्तार पकड़ ली है। जहां पहले प्रति वर्ग मीटर कुछ सौ रुपये मिलते थे, अब चार गुना ज्यादा भाव चल रहे हैं। किसान अपनी जमीन बेचने को तैयार हैं, जबकि स्मार्ट निवेशक प्लॉट खरीदकर लंबे समय के फायदे की फिराक में हैं। इसी तरह के पुराने प्रोजेक्ट्स में देखा गया कि अधिग्रहण के बाद कीमतें दोगुनी-तिगुनी हो जाती हैं। यहां भी वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज के लिए जमीन की डिमांड बढ़ेगी, जो भावों को और ऊपर धकेलेगी।
आर्थिक उछाल की उम्मीदें
यह कॉरिडोर न सिर्फ यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि हजारों नौकरियां भी पैदा करेगा। लॉजिस्टिक्स पार्क, फैक्ट्रियां और होटल चेन यहां जमने लगेंगी। पूर्वांचल के किसानों को अपनी फसलें जल्दी बेचने से बेहतर कमाई होगी, जबकि पर्यटन को बल मिलेगा। कुशीनागर जैसे बौद्ध तीर्थस्थलों तक पहुंच आसान होने से लाखों यात्री आकर्षित होंगे। कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट पूर्वी यूपी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगा।
निवेशकों के लिए सुनहरा मौका
अभी निवेश का बेस्ट टाइम है, क्योंकि निर्माण शुरू होते ही कीमतें और चढ़ेंगी। छोटे-मोटे प्लॉट या कमर्शियल स्पेस में पैसा लगाएं, लेकिन शॉर्ट टर्म फ्लिपिंग से बचें। पांच-सात साल का होराइजन रखें, तो रिटर्न जबरदस्त मिलेगा। एनआरआई भी इस क्षेत्र पर नजर रखें, क्योंकि कनेक्टिविटी बढ़ने से रियल एस्टेट बूम होगा। जल्दबाजी न करें, लेकिन मौके को हाथ से न जाने दें।
















