
भारत में साइबर अपराध और स्पैम कॉल्स की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) और ट्राई (TRAI) ने कमर कस ली है, साल 2026 तक देश के टेलीकॉम सेक्टर में दो क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहे हैं— CNAP (Calling Name Presentation) और SIM-Binding। इन नियमों के लागू होने के बाद न सिर्फ कॉलिंग सिस्टम पारदर्शी होगा, बल्कि मैसेजिंग ऐप्स की सुरक्षा भी कई गुना बढ़ जाएगी।
Table of Contents
CNAP: अब स्क्रीन पर चमकेगा कॉल करने वाले का असली नाम
अभी तक अनजान नंबर से कॉल आने पर पहचान के लिए यूज़र्स ‘Truecaller’ जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स पर निर्भर रहते थे, जो हमेशा सटीक नहीं होते। लेकिन 2026 से लागू होने वाले CNAP सिस्टम के तहत:
- जब भी कोई आपको कॉल करेगा, आपके फोन की स्क्रीन पर उसका वही नाम दिखाई देगा जो उसके सिम कार्ड के KYC (पहचान पत्र) दस्तावेजों में दर्ज है।
- स्कैमर्स अब अपनी पहचान छुपाकर या किसी बैंक अधिकारी का झूठा नाम बताकर लोगों को ठग नहीं पाएंगे।
- सरकार ने सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों को 31 मार्च 2026 तक इस सिस्टम को पूरी तरह लागू करने के निर्देश दिए हैं।
SIM-Binding: WhatsApp और Telegram चलाने के नियम होंगे सख्त
साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार अब मैसेजिंग ऐप्स (OTT Platforms) के लिए SIM-Binding अनिवार्य करने जा रही है। इसका सबसे बड़ा असर उन अपराधियों पर पड़ेगा जो विदेशों में बैठकर भारतीय नंबरों से ठगी करते हैं।
- अब WhatsApp या Telegram जैसे ऐप्स केवल तभी चलेंगे जब संबंधित सिम कार्ड उस फोन में भौतिक रूप से मौजूद होगा।
- सुरक्षा के लिहाज से अब WhatsApp Web या डेस्कटॉप वर्जन का इस्तेमाल करने वालों को हर 6 घंटे में लॉग-आउट कर दिया जाएगा। दोबारा इस्तेमाल के लिए QR कोड स्कैन करना अनिवार्य होगा।
- सिम-बाइंडिंग से उन फर्जी अकाउंट्स का अंत होगा जो बिना सिम कार्ड के केवल ओटीपी के जरिए एक्टिवेट कर लिए जाते थे।
आम जनता पर क्या होगा असर?
इन नियमों के लागू होने से जहाँ सुरक्षा बढ़ेगी, वहीं यूज़र्स को कुछ बदलावों के लिए तैयार रहना होगा:
- अब अनजान कॉल उठाने से पहले आपको पता होगा कि दूसरी तरफ कौन है, जिससे स्पैम कॉल्स की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी।
- सिम-बाइंडिंग के कारण बिना सिम वाले टैबलेट या सेकेंडरी फोन पर प्राइमरी मैसेजिंग ऐप चलाना मुश्किल हो सकता है।
- डेस्कटॉप पर काम करने वाले प्रोफेशनल्स को हर 6 घंटे में ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जो थोड़ा समय लेने वाला हो सकता है।
सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, हालांकि इससे यूज़र्स की प्राइवेसी और सुविधा को लेकर बहस छिड़ सकती है, लेकिन साइबर अपराधों के मौजूदा ग्राफ को देखते हुए ये बदलाव अनिवार्य नजर आते हैं।
अधिक आधिकारिक जानकारी के लिए यूज़र्स भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) की वेबसाइट देख सकते हैं।
















