
अगर आप भी अपने बैंक खाते से बार-बार नकद (Cash) निकालते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरुरी है, आयकर विभाग (Income Tax Department) ने नकद लेनदेन को लेकर नियमों को और भी कड़ा कर दिया है, अब एक तय सीमा से अधिक कैश निकालने पर न केवल आपका टीडीएस (TDS) कटेगा, बल्कि विभाग आपको नोटिस भी थमा सकता है।
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ITR नहीं भरने वालों पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’
आयकर विभाग के नए नियमों के मुताबिक, यदि आपने पिछले 3 वित्तीय वर्षों से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो आप विभाग की विशेष निगरानी में हैं:
- 20 लाख से अधिक की निकासी: एक वित्तीय वर्ष में 20 लाख रुपये से ज्यादा कैश निकालने पर 2% TDS देना होगा।
- 1 करोड़ से अधिक की निकासी: यदि निकासी 1 करोड़ रुपये को पार करती है, तो 5% की दर से टीडीएस वसूला जाएगा।
रिटर्न भरने वालों के लिए क्या है नियम?
जो लोग नियमित रूप से अपना ITR फाइल करते हैं, उन्हें विभाग ने थोड़ी राहत दी है, ऐसे खाताधारक एक वित्तीय वर्ष में 1 करोड़ रुपये तक नकद निकाल सकते हैं, हालांकि, 1 करोड़ रुपये की सीमा पार होते ही कुल राशि पर 2% TDS काटा जाएगा।
कब आ सकता है इनकम टैक्स नोटिस?
सिर्फ टीडीएस कटना ही एकमात्र चिंता नहीं है, आयकर विभाग आपके बैंक लेनदेन की रिपोर्ट Statement of Financial Transactions (SFT) के जरिए प्राप्त करता है, नोटिस आने के मुख्य कारण ये हो सकते हैं:
- आय और निकासी में अंतर: यदि आपकी घोषित सालाना आय कम है और आप बैंक से भारी मात्रा में कैश निकाल रहे हैं।
- हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन: बैंक को संदिग्ध लगने वाले किसी भी बड़े लेनदेन की जानकारी विभाग को देनी होती है।
सहकारी समितियों (Co-operative Societies) को बड़ी राहत
सरकार ने सहकारी समितियों के लिए नकद निकासी की सीमा को बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये कर दिया है, यानी 3 करोड़ रुपये तक की निकासी पर इन समितियों को कोई टीडीएस नहीं देना होगा।
कैसे बचें कानूनी पचड़े से?
विशेषज्ञों की सलाह है कि आयकर विभाग के नोटिस से बचने के लिए जितना संभव हो डिजिटल पेमेंट (UPI, NEFT, RTGS) का उपयोग करें, यदि बड़ी नकदी निकालना अनिवार्य है, तो उसके वैध दस्तावेज और उद्देश्य का प्रमाण अपने पास रखें, अपने टीडीएस और टैक्स फाइलिंग की स्थिति जांचने के लिए आप आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।
टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार अब हर बड़े कैश ट्रांजैक्शन को ट्रैक कर रही है, इसलिए अपनी निकासी और खर्च का सही हिसाब रखना ही समझदारी है।
















