देश में आधार कार्ड से जुड़े नियमों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ रहा है। यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी UIDAI अब नई नीति पर काम कर रही है जिसके तहत 18 साल तक के सभी बच्चों के लिए आधार बनवाने में जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य करने की तैयारी की जा रही है। पहले यह नियम केवल 0 से 5 वर्ष की उम्र के बच्चों तक सीमित था, लेकिन अब इसे सभी नाबालिगों पर लागू करने की संभावना है।

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पहचान प्रक्रिया होगी मजबूत और सुरक्षित
अगर यह प्रस्ताव लागू कर दिया जाता है तो आधार एनरोलमेंट के लिए केवल बर्थ सर्टिफिकेट ही एक मान्य दस्तावेज रहेगा। इसका उद्देश्य पहचान प्रणाली को और पारदर्शी बनाना है ताकि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से आधार बनवाने वालों पर रोक लगाई जा सके। UIDAI का मानना है कि जन्म प्रमाण पत्र के माध्यम से न केवल सटीक डेटा मिलेगा बल्कि बच्चों की पहचान को लेकर गलतियों में भी कमी आएगी।
हर दिन हजारों नए आवेदन मिल रहे हैं
दरअसल UIDAI के अनुसार हर दिन करीब 75 हजार नए आधार कार्ड के आवेदन आते हैं जिनमें 98 प्रतिशत आवेदन बच्चों के होते हैं। जिनमें से 0 से 5 वर्ष और 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की संख्या लगभग समान है। वहीं 18 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों के आवेदन मात्र दो प्रतिशत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुझान देश की जनसंख्या वृद्धि की दर के अनुरूप है और यह बताता है कि आधार हर आयु वर्ग के लिए कितना अहम बन चुका है।
नाम और जन्म तिथि बदलने पर सख्ती
UIDAI छोटे बच्चों के नाम व जन्म तिथि बदलने की प्रक्रिया को भी पारदर्शी बना रहा है। अब नाम बदलने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट को ही सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाएगा। संस्था ने नए नियमों के तहत जन्म तिथि में केवल एक बार बदलाव की अनुमति दी है जबकि नाम केवल दो बार बदला जा सकेगा। यदि किसी व्यक्ति को बड़े स्तर पर बदलाव करने की जरूरत है तो उसके लिए गजट नोटिफिकेशन अनिवार्य किया गया है।
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अपडेशन की सबसे ज्यादा मांग पते और मोबाइल नंबर को लेकर
आधार कार्ड में बदलाव के लिए UIDAI को हर साल करीब 23 करोड़ आवेदन प्राप्त होते हैं। इनमें सबसे अधिक आवेदन पता और मोबाइल नंबर अपडेट करने के होते हैं क्योंकि लोग अक्सर अपने स्थान या मोबाइल सेवा प्रदाता बदलते रहते हैं। इसके अलावा नाम और जन्म तिथि में सुधार से जुड़ी कई रिक्वेस्ट हर दिन आती हैं।
तकनीक की मदद से आधार सिस्टम और स्मार्ट बनेगा
UIDAI अब ऑफलाइन दस्तावेज जांच की जगह ऑनलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम पर जोर दे रहा है। देश के लगभग सभी राज्यों के जन्म प्रमाण पत्र सिस्टम अब UIDAI के डेटाबेस से जुड़ चुके हैं जिससे दस्तावेजों की सही जांच तुरंत की जा सकेगी। इसके साथ ही एक नया यूनिवर्सल क्लाइंट सॉफ्टवेयर भी तैयार किया जा रहा है जिसके जरिए QR कोड वाले दस्तावेजों को स्कैन करके उनकी वास्तविकता तुरंत जांची जा सकेगी।
नागरिकों के सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम
आधार ने देश में पहचान की नई व्यवस्था को जन्म दिया है। पहले करोड़ों लोग ऐसे थे जिनके पास कोई वैध पहचान दस्तावेज नहीं था लेकिन आधार ने उन्हें वो अधिकार दिया। अब सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों के खाते में पहुंच रहा है जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और फर्जीवाड़े में भारी कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम लागू होने के बाद आधार सिस्टम और अधिक सुरक्षित, सरल और विश्वसनीय बन जाएगा।
















