भारतीय बैंकिंग सेक्टर में हाल ही में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। देश के प्रमुख निजी बैंक ICICI बैंक ने अपने बचत खातों से जुड़ी शर्तों को अपडेट करते हुए मिनिमम बैलेंस की सीमा में बड़ा इजाफा किया है। इस बदलाव के बाद से बैंक के अधिकांश ग्राहकों में असंतोष दिखाई दे रहा है, क्योंकि अब खाते में पहले से कहीं अधिक रुपये रखना जरूरी हो गया है।

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क्या हैं ICICI बैंक के नए नियम
ICICI बैंक ने 2026 की शुरुआत में अपने खातेधारकों पर नई मिनिमम बैलेंस नीति लागू की है। अब मेट्रो शहरों और शहरी इलाकों में खाताधारकों को हर महीने 50,000 रुपये की औसत राशि रखनी होगी। इससे पहले यह सीमा केवल 10,000 रुपये थी। वहीं सेमी-अर्बन क्षेत्रों में यह राशि 5,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है।
ग्रामीण इलाकों में पहले जहां 5,000 रुपये का औसत मिनिमम बैलेंस रखना होता था, अब वहां यह सीमा 10,000 रुपये तय की गई है। बैंक का कहना है कि यह निर्णय आर्थिक स्थिरता और बेहतर ग्राहक अनुभव को ध्यान में रखकर लिया गया है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं का मानना है कि यह नियम मध्यम और निम्न वर्ग के लिए बोझ साबित हो सकता है।
सरकारी बैंकों ने दी राहत
जबकि निजी बैंक मिनिमम बैलेंस बढ़ा रहे हैं, कई सरकारी बैंकों ने ग्राहकों को राहत देने के लिए यह शर्त पूरी तरह समाप्त कर दी है। उदाहरण के तौर पर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने करीब पाँच साल पहले मिनिमम बैलेंस की बाध्यता को खत्म कर दिया था।
इसके बाद केनरा बैंक, इंडियन बैंक और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी क्रमशः 2025 में अपने ग्राहकों को यह सुविधा देते हुए न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने की शर्त हटा दी। अब इन बैंकों के ग्राहक अपने खाते में अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी राशि को रख सकते हैं, और उन पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।
किन बैंकों में अब भी है मिनिमम बैलेंस की शर्त
कुछ निजी बैंक अब भी ग्राहकों से एक तय औसत बैलेंस बनाए रखने की मांग करते हैं। HDFC बैंक में शहरी क्षेत्रों के लिए हर महीने 10,000 रुपये, छोटे शहरों के लिए 5,000 रुपये, और ग्रामीण इलाकों के लिए 2,500 रुपये का बैलेंस रखना अनिवार्य है। इस नियम का पालन न होने पर ग्राहकों से अधिकतम 600 रुपये तक का जुर्माना वसूला जा सकता है।
इसी तरह Axis बैंक में छोटे शहरों और गांवों के खाताधारकों को 10,000 रुपये का मिनिमम बैलेंस रखना होता है। अगर ग्राहक ऐसा नहीं कर पाते, तो बैंक कम पड़ी राशि पर 6% तक का जुर्माना वसूलता है, जिसकी अधिकतम सीमा 600 रुपये निर्धारित है।
ग्राहकों के लिए क्या मतलब है यह फैसला
ICICI बैंक के इस निर्णय के बाद से निजी और सरकारी बैंकों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। जहां सरकारी बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए शर्तें आसान बना रहे हैं, वहीं निजी बैंक अपने राजस्व और नीति सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
यह बदलाव उन ग्राहकों पर सबसे अधिक असर डाल सकता है जिनकी मासिक आमदनी सीमित है या जो खाते का उपयोग केवल बचत के लिए करते हैं। ऐसे में भविष्य में ग्राहक अपने बैंक का चयन करते समय इन नियमों पर खास ध्यान देने लगे हैं।
















