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Pashu Chikitsa Yojana: ₹2 में पशुओं का इलाज! टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें और घर आएगी मोबाइल वेटरनरी यूनिट

अब गाँव-गाँव पहुंचेगी मोबाइल वेटरनरी यूनिट बस टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें और डॉक्टर खुद आएंगे घर! किसानों के लिए ये योजना बन सकती है वरदान।

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उत्तर प्रदेश में पशुपालन करने वाले किसानों और ग्रामीणों के लिए अब पशुओं का इलाज करवाना पहले से कहीं आसान हो गया है। लंबे समय से किसानों को पशुओं के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों या निजी क्लिनिकों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इससे न केवल समय बर्बाद होता था, बल्कि खर्च भी बहुत बढ़ जाता था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मोबाइल वेटरनरी सेवा की शुरुआत की है, जिससे अब कोई भी पशुपालक अपने घर पर ही पशुओं का उपचार करवा सकेगा।

Pashu Chikitsa Yojana: ₹2 में पशुओं का इलाज! टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें और घर आएगी मोबाइल वेटरनरी यूनिट
Pashu Chikitsa Yojana: ₹2 में पशुओं का इलाज! टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें और घर आएगी मोबाइल वेटरनरी यूनिट 2

टोल फ्री नंबर से होगी सेवा की शुरुआत

इस सेवा का लाभ उठाने के लिए सरकार ने टोल फ्री नंबर 1962 जारी किया है। जो भी किसान अपने पशुओं के इलाज के लिए डॉक्टर बुलाना चाहते हैं, उन्हें इस नंबर पर कॉल करना है। कॉल करने के बाद प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम मोबाइल वेटरनरी वैन के साथ आपके घर पहुंचेगी। यह सेवा प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक उपलब्ध रहेगी, ताकि किसान अपनी सुविधा के अनुसार समय चुन सकें।

मामूली शुल्क में मिलेगी पूरी सुविधा

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें इलाज के लिए केवल ₹2 से ₹10 तक का मामूली शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा पशुओं के लिए जो भी दवाएं या आवश्यक सामग्री होगी, वह भी डॉक्टर वैन के माध्यम से साथ लाएंगे। यानी किसानों को न तो बाहर जाकर दवा खरीदनी होगी और न ही अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।

ग्रामीण किसानों के लिए बड़ी राहत

गांवों में रहने वाले पशुपालकों के लिए यह सेवा किसी राहत से कम नहीं है। सामान्यतः ग्रामीण इलाकों में अस्पतालों की कमी और परिवहन की दिक्कत के कारण पशुओं का इलाज समय पर नहीं हो पाता था। नतीजा यह होता था कि बीमारियां गंभीर रूप ले लेती थीं या उत्पादन पर असर पड़ता था। अब मोबाइल वेटरनरी वैन उनकी चौखट तक पहुंचेगी, जिससे पशु स्वस्थ रहेंगे और किसान को आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकेगा।

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आसान प्रक्रिया, बेहतर परिणाम

इस योजना के तहत किसी तरह की जटिल प्रक्रिया नहीं रखी गई है। किसान केवल एक कॉल के माध्यम से सेवा प्राप्त कर सकते हैं। कॉल के बाद पशु के बारे में जानकारी लेने के उपरांत तुरंत डॉक्टर की टीम भेजी जाती है। यह टीम पशु के इलाज के साथ-साथ उसके पोषण, देखभाल और टीकाकरण से जुड़ी सलाह भी देती है। यानी यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि सम्पूर्ण पशु स्वास्थ्य सेवा है।

किसानों में खुशी की लहर

सेवा शुरू होने के बाद से ही राज्य भर के किसान इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। जिन इलाकों में यह सेवा पहुंच चुकी है, वहां पशुपालकों ने बताया कि अब उन्हें अपने पशुओं को अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। कुछ किसानों ने कहा कि पहले इलाज में ₹200-₹300 तक खर्च हो जाता था, जबकि अब वही काम ₹10 से भी कम में हो रहा है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बच रहा है।

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