
भारत सरकार ने हाल ही में तंबाकू और सिगरेट उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है। इस निर्णय का मकसद जहां एक ओर सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और स्मोकिंग को हतोत्साहित करना है, वहीं इसके आर्थिक असर ने निवेशकों और कुछ बड़ी कंपनियों को हिला कर रख दिया है। इस फैसले से सबसे बड़ा झटका देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) को लगा है, जिसे दो दिनों में लगभग 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
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टैक्स बढ़ा, शेयर गिरा और निवेशक घबराए
सरकार द्वारा तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने की घोषणा के बाद आईटीसी (ITC) के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी का स्टॉक एक झटके में लगभग 14 फीसदी टूट गया, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ गया। सिगरेट व्यवसाय से आईटीसी को होने वाली आमदनी पर दबाव पड़ने की आशंका के चलते बाजार में बिकवाली शुरू हो गई।
यह गिरावट सिर्फ आईटीसी तक सीमित नहीं रही, इससे उन संस्थाओं को भी भारी नुकसान हुआ जिनका पैसा आईटीसी के शेयरों में लगा हुआ है।
सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में ही आईटीसी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 70,000 करोड़ रुपये घट गया। इतनी बड़ी गिरावट का मतलब है कि लाखों निवेशकों की कमाई एक झटके में मिट गई।
एलआईसी क्यों आई संकट में?
अब सवाल उठता है कि सिगरेट पर टैक्स बढ़ने और एलआईसी को नुकसान के बीच क्या रिश्ता है? दरअसल, एलआईसी ITC कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक है। कंपनी में इसकी हिस्सेदारी 15.86% है। यानी आईटीसी में जब भी कीमतों में बदलाव होता है, उसका सीधा असर एलआईसी की निवेश वैल्यू पर पड़ता है।
31 दिसंबर तक आईटीसी में एलआईसी की हिस्सेदारी की वैल्यू लगभग 80,028 करोड़ रुपये थी। लेकिन दो कारोबारी दिनों की तेज गिरावट के बाद यह वैल्यू घटकर 68,560 करोड़ रुपये पर आ गई। यानी करीब 11,500 करोड़ रुपये का घाटा सिर्फ शेयरों के भाव गिरने से। एलआईसी के अलावा, अन्य सार्वजनिक संस्थाएं भी इस झटके से बच नहीं पाईं। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC) को करीब 1,254 करोड़ रुपये और न्यू इंडिया एश्योरेंस को लगभग 1,018 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
सरकार के फैसले का तर्क
सरकार का कहना है कि सिगरेट और तंबाकू पर टैक्स बढ़ाना जरूरी है ताकि लोगों में धूम्रपान की आदत कम हो और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरों को रोका जा सके। तंबाकू उत्पादों पर पहले से ही 40% जीएसटी (GST) लगाया जाता है, लेकिन अब एक्साइज ड्यूटी जोड़ने से इन उत्पादों की कीमतें और बढ़ जाएंगी। इससे धूम्रपान पर नियंत्रण पाने की कोशिश की जाएगी और सरकार के लिए टैक्स राजस्व का एक नया स्रोत भी बनेगा।
हालांकि, इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो सिगरेट और तंबाकू उत्पादों से अधिक राजस्व कमाती हैं, जैसे कि आईटीसी। मुनाफे का बड़ा हिस्सा इसी व्यवसाय से आने के कारण निवेशकों को डर है कि कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह थी कि उन्होंने त्वरित रूप से शेयर बेचकर निकलना बेहतर समझा।
आर्थिक दृष्टिकोण से सीख
यह प्रसंग एक महत्वपूर्ण सबक भी देता है कि सरकारी नीतियों के छोटे से बदलाव से भी शेयर बाजार किस तरह प्रभावित होता है। एलआईसी जैसी सरकारी संस्था, जो करोड़ों लोगों के निवेश और बीमा धन की संरक्षक है, बाजार की अस्थिरता से अछूती नहीं रहती। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह नुकसान “पेपर लॉस” है यानी अस्थायी मूल्य में गिरावट। अगर बाजार स्थिर होता है, तो आने वाले महीनों में यह घाटा कम हो सकता है।
















