Join Youtube

Parenting Tips: बच्चों को हर बात ‘ज्यादा समझाना’ है एक बड़ी भूल! उनके स्वाभिमान और फैसले लेने की क्षमता पर पड़ता है बुरा असर।

 बच्चों की परवरिश में माता-पिता अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि उन्हें सही-गलत का अंतर कैसे सिखाएं, इसी कोशिश में कई पेरेंट्स हर छोटी-बड़ी बात पर बच्चों को 'ज्यादा समझाने' या लंबे लेक्चर देने की आदत डाल लेते हैं, मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह आदत बच्चों के मानसिक विकास और उनके स्वाभिमान (Self-esteem) के लिए घातक साबित हो सकती है

Published On:
Parenting Tips: बच्चों को हर बात 'ज्यादा समझाना' है एक बड़ी भूल! उनके स्वाभिमान और फैसले लेने की क्षमता पर पड़ता है बुरा असर।
Parenting Tips: बच्चों को हर बात ‘ज्यादा समझाना’ है एक बड़ी भूल! उनके स्वाभिमान और फैसले लेने की क्षमता पर पड़ता है बुरा असर।

 बच्चों की परवरिश में माता-पिता अक्सर इस उलझन में रहते हैं कि उन्हें सही-गलत का अंतर कैसे सिखाएं, इसी कोशिश में कई पेरेंट्स हर छोटी-बड़ी बात पर बच्चों को ‘ज्यादा समझाने’ या लंबे लेक्चर देने की आदत डाल लेते हैं, मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह आदत बच्चों के मानसिक विकास और उनके स्वाभिमान (Self-esteem) के लिए घातक साबित हो सकती है। 

यह भी देखें: Driving Tips: ओरिजिनल कागज नहीं हैं? इस एक मैसेज से ट्रैफिक पुलिस नहीं काटेगी चालान

स्वाभिमान पर पड़ता है प्रहार

जब माता-पिता किसी बात को बार-बार दोहराते हैं या जरूरत से ज्यादा विस्तार में समझाते हैं, तो बच्चों को यह संदेश जाता है कि वे खुद से समझने में सक्षम नहीं हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों का आत्मविश्वास (Confidence) डगमगाने लगता है और वे खुद को अक्षम मानने लगते हैं। 

फैसले लेने की क्षमता होती है प्रभावित 

‘ज्यादा समझाने’ की प्रवृत्ति बच्चों को मानसिक रूप से माता-पिता पर निर्भर बना देती है, जो माता-पिता बच्चों के लिए हर स्थिति को खुद सुलझा देते हैं या उनके निर्णयों को नियंत्रित करते हैं, उन बच्चों में निर्णय लेने के कौशल (Decision-making skills) की भारी कमी देखी जाती है, ऐसे बच्चे बड़े होकर चुनौतियों का सामना करने से कतराते हैं और हर छोटे काम के लिए दूसरों की सलाह पर निर्भर रहते हैं। 

बच्चे हो जाते हैं ‘ट्यून आउट’

अत्यधिक लेक्चरबाजी का एक बड़ा नुकसान यह भी है कि बच्चे धीरे-धीरे माता-पिता की बातों को अनसुना (Tune out) करने लगते हैं,, जब निर्देश बहुत लंबे और उपदेशात्मक होते हैं, तो वे बच्चों के लिए सिर्फ एक ‘शोर’ की तरह हो जाते हैं, जिससे असल संदेश खो जाता है।

यह भी देखें: How to Clean White Shoes: पीले पड़ चुके सफेद जूते अब चमकेंगे दूध जैसे! बिना रगड़े साफ करने का ₹5 वाला घरेलू जादुई नुस्खा

क्या है सही तरीका?

  • अपनी बात को कम और सटीक शब्दों में कहें ताकि बच्चा उसे आसानी से याद रख सके।
  • उन्हें सीधे उत्तर देने के बजाय “तुम्हें क्या लगता है कि इसे कैसे करना चाहिए?” जैसे सवाल पूछें।
  •  बच्चों को खुद गलती करने और उनके परिणामों से सीखने का मौका दें, यह उनके स्वतंत्र व्यक्तित्व के लिए अनिवार्य है। 
Parenting Tips

Leave a Comment

अन्य संबंधित खबरें

🔥 वायरल विडिओ देखें