मध्यप्रदेश में अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना को फिर से लेकर चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में अधिकारियों के साथ बैठक कर इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। लंबे समय से रुकी हुई यह परियोजना अब फिर से एक्टिव मोड में आने की उम्मीद जता रही है।

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तीन राज्यों को जोड़ेगा हाई-स्पीड मार्ग
अटल प्रोग्रेस-वे एक महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है जो मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश को सीधा जोड़ेगी। भारतमाला योजना के अंतर्गत प्रस्तावित इस एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई लगभग 404 किलोमीटर होगी। इसका आरंभ राजस्थान के कोटा जिले के सीमाल्या गांव से होगा और यह मध्यप्रदेश के श्योपुर, मुरैना तथा भिंड जिलों से होकर उत्तरप्रदेश के इटावा जिले के निनावा तक पहुंचेगा। इसके निर्माण से यात्रा का समय लगभग पांच घंटे तक कम हो जाएगा जिससे परिवहन और व्यापार को बड़ी राहत मिलेगी।
परियोजना की लागत और वर्तमान स्थिति
शुरुआती समय में इस परियोजना की लागत करीब छह हजार करोड़ रुपये अनुमानित थी लेकिन समय एवं निर्माण लागत बढ़ने से अब यह राशि लगभग 23 हजार छह सौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। मध्यप्रदेश में 313 किलोमीटर, राजस्थान में 72 किलोमीटर और उत्तरप्रदेश में लगभग 23 किलोमीटर का हिस्सा विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए कुल 454 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। श्योपुर जिले में करीब 600 हेक्टेयर भूमि इस योजना में शामिल होगी जिसमें सरकारी और निजी जमीन दोनों का अधिग्रहण किया जाना है।
किसानों की आपत्ति और नई योजना
भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों ने इस परियोजना का विरोध किया था क्योंकि सड़क का प्रस्तावित मार्ग उनकी कृषि भूमि से होकर गुजरता था। उनकी मांग थी कि सड़क को बीहड़ों से होकर निकाला जाए ताकि खेती की जमीन बची रहे। इसके बाद सरकार ने किसानों की बात को ध्यान में रखते हुए एलाइनमेंट संशोधित करने का निर्णय लिया। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि भूमि अधिग्रहण केवल किसानों की सहमति से ही किया जाए ताकि किसी को नुकसान न हो।
क्षेत्रीय विकास की नई उम्मीद
अटल प्रोग्रेस-वे के पूरा होने के बाद चंबल अंचल के विकास की गति तेज होने की उम्मीद है। यह परियोजना न केवल लोगों को तेज और सुरक्षित आवागमन का विकल्प देगी बल्कि व्यापार, पर्यटन और उद्योग के नए अवसर भी खोलेगी। मुरैना, भिंड और श्योपुर जैसे जिलों को दिल्ली, कोटा, मुंबई, आगरा और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में नए काम के मौके मिल सकेंगे।
बैठक में उच्च स्तरीय समीक्षा
मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में अटल प्रोग्रेस-वे के दो संभावित प्रस्तावों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखते हुए परियोजना को शीघ्र पूरा किया जाए।
अटल प्रोग्रेस-वे केवल एक सड़क नहीं बल्कि चंबल अंचल की सैकड़ों गांवों की जीवनरेखा बन सकती है। इस मार्ग के शुरू होने से पहले जहां यात्रा मुश्किल थी वहीं इसके निर्माण के बाद यह क्षेत्र विकास की नई परिभाषा तय कर सकता है।
















