आजकल एटीएम कार्ड जेब में रखने की जरूरत कम ही पड़ती है। स्मार्टफोन और UPI ऐप के दम पर आप गांव की छोटी दुकान से लेकर शहर के किसी कोने तक आसानी से नकद पैसे निकाल सकेंगे। यह नया सिस्टम लाखों लोगों के लिए वरदान साबित होगा, खासकर जहां बैंक या एटीएम दूर हैं।

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बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट की भूमिका
देश में लाखों किराने की दुकानें, एनजीओ और स्थानीय एजेंट बैंकों के बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) के रूप में काम करते हैं। ये दूरदराज इलाकों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाते हैं। अब इनके पास खास क्यूआर कोड होगा। ग्राहक अपने यूपीआई ऐप से कोड स्कैन करेगा, पिन डालेगा और बीसी तुरंत कैश दे देगा। पैसे सीधे आपके अकाउंट से उसके खाते में चले जाएंगे। अभी शहरों में 1000 रुपये और गांवों में 2000 रुपये तक ही निकासी होती है, लेकिन जल्द यह सीमा बढ़कर 10,000 तक हो सकती है।
कैसे काम करेगा पूरा सिस्टम?
मान लीजिए आप किसी गांव में हैं और पैसे चाहिए। पास की दुकान पर बीसी का क्यूआर कोड स्कैन करें। फोन पर अमाउंट डालें, यूपीआई पिन भरें। दुकानदार कैश गिनकर देगा और ट्रांजेक्शन पूरा। पुराने तरीके में माइक्रो एटीएम पर कार्ड स्वाइप या आधार फिंगरप्रिंट स्कैन करना पड़ता था, जो कई लोगों को मुश्किल लगता है। यहां सिर्फ फोन काफी है। एनपीसीआई जैसी संस्थाएं इस पर काम कर रही हैं ताकि पूरे देश में 20 लाख बीसी पॉइंट्स पर सुविधा मिले।
ग्रामीण इलाकों में बड़ा बदलाव
दूर के गांवों में एटीएम ढूंढना मुश्किल होता है। वहां बीसी सिस्टम से रोजमर्रा के पैसे आसानी से मिलेंगे। जिनके फिंगरप्रिंट साफ नहीं आते या कार्ड भूल जाते हैं, उनके लिए तो यह सबसे आसान रास्ता है। बुजुर्ग और महिलाएं भी बिना झंझट के इस्तेमाल कर सकेंगे। अभी यूपीआई से बिल भुगतान, शॉपिंग आसान है, लेकिन कैश निकासी इसे और मजबूत बनाएगी।
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एटीएम खत्म तो नहीं होंगे?
बिल्कुल नहीं। एटीएम में ज्यादा कैश होता है और ये 24 घंटे खुले रहते हैं। बीसी सिस्टम छोटे अमाउंट के लिए परफेक्ट है। दोनों साथ चलेंगे। डिजिटल इंडिया को इससे नई गति मिलेगी। सुरक्षा के लिए डबल चेक जैसे पिन और बायोमेट्रिक रहेंगे, ताकि फ्रॉड का डर न हो।
कब तक लागू होगा?
प्लानिंग स्टेज में है, लेकिन कुछ जगहों पर पहले से शुरू हो चुका। बैंकों को बीसी तैयार करने होंगे। जागरूकता फैलानी होगी ताकि लोग भरोसा करें। यह बदलाव कैशलेस अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगा। अगर आप ग्रामीण क्षेत्र में हैं, तो जल्द ही पास की दुकान ही आपका बैंक बन जाएगी। कुल मिलाकर, यूपीआई अब हर जरूरत पूरी करेगा।
















