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Live-in Partner को पेंशन पर बड़ा फैसला! हाईकोर्ट के इस निर्देश से बदल जाएंगे नियम, जानें किसे मिलेगा लाभ।

लाइव-इन पार्टनर को पेंशन का झटका! हाईकोर्ट का धमाकेदार फैसला - पुराने नियम उखड़ेंगे, नया कानून बनेगा। क्या आपका साथी पात्र? तुरंत चेक करें, लाखों को फायदा या नुकसान? पूरी डिटेल अंदर!

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दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी पेंशन के नियमों को चुनौती देने वाला एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। एक सेवानिवृत्त सरकारी अफसर ने अपनी 40 साल पुरानी लिव-इन पार्टनर और उनके बच्चों को पारिवारिक पेंशन व स्वास्थ्य लाभ दिलाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट ने न सिर्फ उनकी मांग को सही ठहराया, बल्कि केंद्र सरकार को तुरंत कार्रवाई के निर्देश भी दे दिए। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने साफ कहा कि रिश्ते को कभी छिपाया नहीं गया, तो सेवानिवृत्ति के बाद लाभों से वंचित करना अन्याय है।

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Live-in Partner को पेंशन पर बड़ा फैसला! हाईकोर्ट के इस निर्देश से बदल जाएंगे नियम, जानें किसे मिलेगा लाभ। 2

कर्मचारी की जिंदगी की उलझनें

यह मामला सालों पुरानी जिंदगी की उलझनों से जुड़ा है। 1983 में जब याचिकाकर्ता की पत्नी ने बिना तलाक के साथ छोड़ दिया, तो उन्होंने एक अन्य महिला संग जीवन बिताना शुरू किया। इस साथी संग दो बच्चे भी हुए। विभाग ने 1990 में आरोप लगाते हुए चार साल तक वेतन में चार चरणों की कटौती की सजा सुनाई।

फिर 2011 में रिटायरमेंट से पहले राजनयिक पासपोर्ट आवेदन में कथित गलत जानकारी के नाम पर जांच हुई। नतीजा यह निकला कि उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी का 50 फीसदी हिस्सा रोक लिया गया। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने 2018 में इसे सही माना, लेकिन हाई कोर्ट ने 7 जनवरी को सब कुछ पलट दिया।

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पारदर्शिता ही थी असली हथियार

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कर्मचारी ने अपनी पूरी सेवा के दौरान लिव-इन रिलेशनशिप का खुलासा किया था। सर्विस रिकॉर्ड में पार्टनर और बच्चों का जिक्र बार-बार आया। ऐसे में इसे ‘गंभीर दुराचार’ बताना बेतुका है। सीसीएस पेंशन नियम सिर्फ सच्चे धोखे या लापरवाही पर ही पेंशन रोकने की इजाजत देते हैं, जो यहां लागू नहीं होता।

कोर्ट ने पाया कि पासपोर्ट आवेदन में कोई छल या बुरा इरादा नहीं था। पत्नी की लंबी अनुपस्थिति के बावजूद पारदर्शिता बरती गई। इसलिए, रुकी पेंशन और ग्रेच्युटी 6 फीसदी सालाना ब्याज सहित तुरंत जारी करने का आदेश दिया गया। साथ ही, पेंशन भुगतान आदेश में पार्टनर व बच्चों को जोड़ने के आवेदन पर विचार का हुक्म सुनाया। सीजीएचएस स्वास्थ्य सुविधाओं का रास्ता भी साफ कर दिया।

भविष्य में क्या बदलाव आएंगे?

यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत है। आज के दौर में लिव-इन रिलेशनशिप आम हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इन्हें कुछ कानूनी मान्यता दी है, लेकिन सरकारी पेंशन में यह पहली बड़ी जीत है। कर्मचारी संगठन इसे सराह रहे हैं। उनका मानना है कि पुरानी शादियों की जटिलताओं या तलाक की देरी के चलते लोगों को भुगतान से महरूम नहीं रखा जाना चाहिए। अब केंद्र सरकार को पेंशन नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।

क्या यह सभी विभागों में लागू होगा? या सिर्फ लंबे समय के रिश्तों तक सीमित रहेगा? सवाल वही हैं, लेकिन उम्मीद जगी है। रिटायर्ड कर्मचारी अब आर्थिक तंगी से निजात पा सकेंगे। उनके परिवार को वो सम्मान मिलेगा, जो सालों की मेहनत का हक है। यह केस साबित करता है कि न्याय देर करे, लेकिन इंसाफ जरूर करता है।

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