दिल्ली से देहरादून की यात्रा अब पहले से कई गुना तेज और सुविधाजनक होने वाली है। लंबे समय से निर्माणाधीन दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है। यह एक्सप्रेसवे न केवल राजधानी और उत्तराखंड की राजधानी के बीच की दूरी घटाएगा बल्कि रास्ते में आने वाले कई जिलों के विकास की रफ्तार भी बढ़ाएगा। हालांकि, इस सफर का आनंद लेने के लिए यात्रियों को टोल टैक्स के रूप में अच्छा-खासा शुल्क देना पड़ सकता है।

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कितना देना होगा टोल टैक्स?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार, जब यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह चालू हो जाएगा, तो दिल्ली से देहरादून तक कार से जाने पर यात्रियों को करीब 670 रुपये टोल टैक्स देना होगा। हल्के मालवाहक वाहनों के लिए यह राशि लगभग 1085 रुपये, और बस या ट्रक चालकों के लिए करीब 2275 रुपये तक हो सकती है।
इस एक्सप्रेसवे पर कुल पाँच टोल प्लाजा बनाए गए हैं, जहां यात्रा की दूरी के आधार पर अलग-अलग दरें देने होंगी। अगर कोई यात्री केवल बागपत तक या ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) तक जा रहा है, तो उसे फिलहाल किसी शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
कहां तक बना है एक्सप्रेसवे?
अभी तक अक्षरधाम से बागपत के मवीकला गांव तक 31.6 किलोमीटर का हिस्सा ट्रायल के लिए खोला जा चुका है। इस रूट से दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों तक पहुंचना आसान हो गया है। हालांकि देहरादून तक का पूरा रास्ता खुलने में अभी थोड़ा समय लग सकता है। बाकी खंडों पर तेजी से निर्माण कार्य जारी है और आने वाले महीनों में इसे पूरी तरह शुरू करने की योजना है।
एक्सप्रेसवे की पूरी रूट डिटेल
यह 212 किलोमीटर लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जो अक्षरधाम मंदिर (दिल्ली) से शुरू होकर लोनी, बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाता है। परियोजना की कुल लागत लगभग 12 हजार करोड़ रुपये है। इसे चार हिस्सों में बांटा गया है ताकि निर्माण एक साथ तेजी से हो सके।
दिल्ली वाले हिस्से की लंबाई करीब 14.5 किमी, जबकि गाजियाबाद और बागपत क्षेत्र का हिस्सा लगभग 17 किमी में फैला है। यहां इसे सीधा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) से जोड़ा गया है, जो पहले से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का हिस्सा है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा यह हाईवे
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीकों के साथ तैयार किया जा रहा है। इसमें 12 इंटरचेंज, आधुनिक साइन सिस्टम, LED लाइटिंग, CCTV निगरानी और इमरजेंसी सेवाएं शामिल होंगी। कुछ हिस्सों पर एलिवेटेड सेक्शन और साउंड बैरियर लगाए गए हैं, जिससे पास के आवासीय इलाकों में शोर कम पहुंचे।
हालांकि कुछ जगहों, खासकर मंडोला एरिया में, रैंप और सर्विस रोड को लेकर विवाद चल रहा है, जिसकी वजह से वहां निर्माण अस्थायी रूप से रुका है। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम
एक्सप्रेसवे शुरू होने से न केवल दिल्ली-दून के बीच यात्रा समय घट जाएगा, बल्कि पर्यटन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलेगा। दिल्ली से देहरादून की दूरी अब महज तीन घंटे में पूरी की जा सकेगी। यह उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों तक तेज़ पहुँच सुनिश्चित करेगा।
















