
साल 2026 की शुरुआत के साथ ही मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध के बादल घने हो गए हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से ईरान के प्रति “मैक्सिमम प्रेशर” की नीति ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, ट्रंप प्रशासन की आक्रामक बयानबाजी और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर संभावित सैन्य कार्रवाई की चर्चाओं के बीच तेहरान ने अपना घातक ‘रेंज मैप’ सार्वजनिक कर दिया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप ने ‘बटन दबाया’ यानी सैन्य हमला शुरु किया, तो ईरान अपनी 2,500 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइलों से इन 8 देशों में तबाही मचा सकता है।
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संभावित प्रभाव
- क्षेत्रीय अस्थिरता: मध्य पूर्व में एक बड़े सैन्य टकराव से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और मानवीय संकट पैदा हो सकता है।
- आर्थिक परिणाम: तेल उत्पादन और शिपिंग मार्ग बाधित हो सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होगा और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा।
- मानवीय लागत: किसी भी सैन्य संघर्ष के परिणामस्वरूप भारी संख्या में नागरिक हताहत हो सकते हैं और बड़े पैमाने पर विस्थापन हो सकता है।
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कूटनीति और तनाव कम करने के प्रयास
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इन तनावों को कम करने के लिए कूटनीतिक समाधान खोजने का प्रयास कर रहा है, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताओं पर चर्चा जारी है, जिसका लक्ष्य क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना है।
स्थिति जटिल बनी हुई है, और दुनिया इस बात पर करीब से नज़र रख रही है कि क्या कूटनीति सफल होगी या क्षेत्रीय तनाव और बढ़ जाएगा।
















