
मकान मालिकों के लिए किराएदार से घर खाली कराना अक्सर एक बड़ी चुनौती बन जाता है, कई बार किराएदार महीनों तक किराया नहीं देते और मकान खाली करने के नाम पर विवाद करने लगते हैं, अक्सर लोग ऐसी स्थिति में पुलिस की मदद लेते हैं, लेकिन कानूनन पुलिस के पास किराएदार को जबरन बाहर निकालने का अधिकार नहीं है, वर्ष 2026 में लागू नए नियमों और ‘मॉडल टेनेंसी एक्ट’ (Model Tenancy Act) ने अब इस प्रक्रिया को स्पष्ट और तेज बना दिया है।
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औपचारिक कानूनी नोटिस (Eviction Notice)
सबसे पहले किसी वकील के माध्यम से किराएदार को एक औपचारिक ‘बेदखली नोटिस’ भेजें, इसमें स्पष्ट कारण (जैसे किराया न देना या एग्रीमेंट की अवधि समाप्त होना) और मकान खाली करने की एक समयसीमा (आमतौर पर 15 से 30 दिन) दें। अधिकांश मामलों में, कानूनी नोटिस मिलते ही किराएदार संपत्ति खाली कर देते हैं।
रेंट अथॉरिटी या रेंट ट्रिब्यूनल का रुख करें
2026 के नए नियमों के तहत अब विवादों के त्वरित समाधान के लिए ‘रेंट अथॉरिटी’ और ‘रेंट ट्रिब्यूनल’ का गठन किया गया है सिविल कोर्ट के लंबे चक्कर काटने के बजाय, आप रेंट अथॉरिटी में शिकायत दर्ज कर सकते हैं, मॉडल टेनेंसी एक्ट के तहत रेंट ट्रिब्यूनल को 60 दिनों के भीतर विवाद सुलझाने का लक्ष्य दिया गया है।
बेदखली का मुकदमा (Suit for Eviction)
यदि नोटिस के बाद भी किराएदार नहीं हटता, तो सिविल कोर्ट में ‘Suit for Eviction’ दायर करें। कोर्ट निम्नलिखित आधारों पर कब्जा वापस दिलाने का आदेश दे सकता है:
- किराया बकाया होना: लगातार दो या अधिक महीनों तक किराया न देना।
- दुरुपयोग: संपत्ति को नुकसान पहुँचाना या वहां अवैध गतिविधियां चलाना।
- स्वयं की आवश्यकता: यदि मकान मालिक को खुद रहने के लिए घर की वास्तविक जरुरत है।
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कोर्ट के आदेश का निष्पादन (Execution of Order)
अदालत से बेदखली का आदेश मिलने के बाद भी यदि किराएदार कब्जा नहीं छोड़ता, तो ‘Execution Petition’ दायर की जाती है इसके बाद कोर्ट ‘बेलिफ’ (Bailiff) नियुक्त करता है, जो पुलिस बल की सहायता से किराएदार को घर से बाहर निकालकर मकान मालिक को कब्जा दिलाता है。
मकान मालिकों के लिए जरूरी सावधानी
- कभी भी किराएदार का सामान बाहर न फेंकें और न ही बिजली-पानी जैसी आवश्यक सेवाएं काटें, ऐसा करना कानूनन अपराध है और आपको दंड या भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
- 2026 के नए नियमों के तहत, बिना पंजीकृत रेंट एग्रीमेंट के घर किराए पर देना भारी पड़ सकता है। हमेशा लिखित और पंजीकृत समझौता ही करें।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मॉडल टेनेंसी एक्ट’ के आने से अब मकान मालिकों को दशकों तक मुकदमे लड़ने की जरुरत नहीं पड़ेगी, बशर्ते उन्होंने सही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया हो।
















