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Indian Army in Bhutan: भारतीय सेना भूटान में क्यों तैनात रहती है? जानें चीन से संभावित खतरों की वजह

हिमालय की गोद में बसे शांत देश भूटान और भारत के बीच के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि अटूट सुरक्षा रणनीतियों पर आधारित हैं, पिछले कुछ वर्षों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर भारतीय सेना भूटान में क्यों तैनात रहती है? 2026 के सामरिक परिदृश्य को देखें तो इसके पीछे चीन से मिलने वाली सीधी चुनौतियां और ऐतिहासिक सुरक्षा संधियाँ सबसे बड़ी वजह हैं

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Indian Army in Bhutan: भारतीय सेना भूटान में क्यों तैनात रहती है? जानें चीन से संभावित खतरों की वजह
Indian Army in Bhutan: भारतीय सेना भूटान में क्यों तैनात रहती है? जानें चीन से संभावित खतरों की वजह

 हिमालय की गोद में बसे शांत देश भूटान और भारत के बीच के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि अटूट सुरक्षा रणनीतियों पर आधारित हैं, पिछले कुछ वर्षों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर भारतीय सेना भूटान में क्यों तैनात रहती है? 2026 के सामरिक परिदृश्य को देखें तो इसके पीछे चीन से मिलने वाली सीधी चुनौतियां और ऐतिहासिक सुरक्षा संधियाँ सबसे बड़ी वजह हैं।

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2007 की मैत्री संधि: सुरक्षा का मजबूत आधार 

भारत और भूटान के बीच संबंधों की नींव ‘2007 की मैत्री संधि’ पर टिकी है, इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा चिंताओं पर निकटता से सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, भारतीय सैन्य प्रशिक्षण दल (IMTRAT) दशकों से भूटान के ‘हा’ जिले में मौजूद है, जो न केवल रॉयल भूटान आर्मी को प्रशिक्षित करता है, बल्कि दोनों देशों के बीच रक्षा तालमेल को भी मजबूत बनाता है। 

‘चिकन नेक’ पर चीन की टेढ़ी नजर 

चीन लगातार भूटान के डोकलाम क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है, सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन डोकलाम पर नियंत्रण पाने में सफल रहता है, तो वह भारत के ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (Chicken’s Neck) के बेहद करीब पहुंच जाएगा, यह 22 किलोमीटर चौड़ा गलियारा भारत के मुख्य भूभाग को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है, युद्ध की स्थिति में चीन यहाँ से भारत का संपर्क काट सकता है, जिसे रोकना भारतीय सेना की प्राथमिकता है। 

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‘स्वैप डील’ और चीनी गांवों का निर्माण

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने भूटान के सामने एक ‘स्वैप डील’ का प्रस्ताव रखा है, जिसमें वह उत्तर के विवादित क्षेत्रों के बदले डोकलाम वाले पश्चिमी हिस्से की मांग कर रहा है, इसके अलावा, चीन भूटान की सीमा के भीतर दोहरे उपयोग वाले गांवों (Xiaokang villages) का निर्माण कर रहा है, चीन की इस विस्तारवादी नीति को काउंटर करने के लिए भारतीय सेना की भूटान में सक्रिय मौजूदगी और निगरानी अनिवार्य हो गई है।

2026 का विजन और बुनियादी ढांचा

साल 2026 तक भारत और भूटान ने अपनी कनेक्टिविटी को नए स्तर पर पहुँचाने का लक्ष्य रखा है, कोकराझार से गेलेफू के बीच बन रही पहली रेलवे लिंक और सीमावर्ती सड़कों का जाल न केवल व्यापार बल्कि आपातकालीन स्थिति में सैन्य रसद पहुंचाने में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, भारतीय सेना का 2026 का ‘नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी’ विजन सीमा प्रबंधन को रीयल-टाइम डेटा के जरिए और अधिक सटीक बनाने पर केंद्रित है।

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भूटान में भारतीय सेना की मौजूदगी केवल एक सैन्य तैनाती नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता का एक कवच है, चीन की ओर से बढ़ते खतरों के बीच, भूटान की सुरक्षा सुनिश्चित करना सीधे तौर पर भारत की अपनी संप्रभुता और उत्तर-पूर्व की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

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