पहलगाम आतंकी घटना के बाद भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा कदम उठाया। 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर जलविद्युत परियोजनाओं का काम अब पूरी तेजी से चल रहा है। बांधों से गाद हटाई जा रही है और नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है। पाकिस्तान को अब चिंता सता रही है, क्योंकि जल डेटा शेयरिंग बंद हो गई है। इससे उसके कृषि क्षेत्र को नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। आइए जानें इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के बारे में।

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दुलहस्ती फेज-2, पर्यावरण अनुकूल बिजली उत्पादन
किश्तवाड़ जिले में चेनाब पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती परियोजना का दूसरा चरण मंजूर हो गया। लगभग 3,200 करोड़ की लागत वाला यह प्रोजेक्ट रन-ऑफ-द-रिवर मॉडल पर बनेगा। नदी प्रवाह बाधित किए बिना बिजली बनेगी, जो स्थानीय ऊर्जा जरूरत पूरी करेगा। इससे रोजगार बढ़ेगा और विकास को गति मिलेगी।
सलाल डैम, बढ़ेगी जल भंडारण क्षमता
चिनाब पर स्थित सलाल पावर स्टेशन में गाद हटाने का कार्य तेज हो गया। NHPC संचालित यह 690 मेगावाट क्षमता वाला बांध अब ज्यादा पानी स्टोर कर सकेगा। पहले अंतरराष्ट्रीय सहमति की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब बिना रुकावट काम चल रहा। इससे बिजली उत्पादन स्थिर रहेगा और बाढ़ प्रबंधन मजबूत होगा।
रतले प्रोजेक्ट, 850 मेगावाट का जल्द चालू होने वाला दमदार प्लांट
किश्तवाड़ में 850 मेगावाट रतले हाइड्रो प्रोजेक्ट मई 2026 तक तैयार होगा। 5,282 करोड़ लागत वाला यह NHPC और राज्य सरकार का संयुक्त प्रयास है। 133 मीटर ऊंचा डैम बनेगा, जो बिजली के साथ सिंचाई भी सुधार देगा। कार्य फिर शुरू होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
सावलकोट, 1856 मेगावाट का महाप्रोजेक्ट
रामबन-उधमपुर में NHPC का सावलकोट प्रोजेक्ट 1856 मेगावाट बिजली पैदा करेगा। पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद दो चरणों में पूरा होगा। J&K की बिजली कमी दूर कर देगा यह। तेज निर्माण से स्थानीय युवाओं को अवसर मिलेंगे।
मंत्री का भरोसा, समयबद्ध पूरा होंगे सभी कार्य
केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल दौरा कर प्रगति जांचा। उन्होंने कहा कि बाधाएं हट चुकी हैं, सभी प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे। सिंधु संधि रोकने से पाकिस्तान की कोई सहायता नहीं। इनसे राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
ये परियोजनाएं J&K को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाएंगी। पाकिस्तान का डर जायज है, क्योंकि चिनाब-झेलम पर भारत का वर्चस्व बढ़ेगा। विकास और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होंगे।
















