
जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, आर्थिक बदहाली और शासन के खिलाफ ईरान में भड़की जन-अग्नि अब बेकाबू होती जा रही है, पिछले 13 दिनों से जारी इस विद्रोह ने ईरान के सभी 31 प्रांतों को अपनी चपेट में ले लिया है।
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देशव्यापी विद्रोह और हिंसक झड़पें
ईरान के निर्वासन में रह रहे क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी की 8 जनवरी 2026 की अपील के बाद प्रदर्शनों में अभूतपूर्व तेजी आई है।
- प्रदर्शनकारी तेहरान के ग्रैंड बाज़ार से लेकर छोटे शहरों तक “तानाशाह की मौत” और “पहलवी की वापसी” के नारे लगा रहे हैं।
- कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों द्वारा IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) और पुलिस चौकियों को निशाना बनाने की खबरें हैं।
इंटरनेट ब्लैकआउट: दुनिया से कटा ईरान
ईरानी अधिकारियों ने प्रदर्शनों को दबाने और सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए 8 जनवरी 2026 की रात से पूरे देश में कम्पलीट इंटरनेट शटडाउन लागू कर दिया है।
- 99% ट्रैफिक ठप: नेटब्लॉक्स (NetBlocks) के अनुसार, ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर से गिरकर मात्र 1% रह गई है।
- उद्देश्य: एमनेस्टी इंटरनेशनल का आरोप है कि यह ब्लैकआउट सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने के लिए किया गया है।
मौतों और गिरफ्तारियों का बढ़ता आंकड़ा
मानवाधिकार संगठन HRANA और अन्य सूत्रों के अनुसार, 28 दिसंबर 2025 से शुरु हुई इस लहर में भारी जानी नुकसान हुआ है:
- अब तक कम से कम 65 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 50 प्रदर्शनकारी और 14 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
- मरने वालों में कम से कम 9 बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।
- अब तक 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय तनाव और चेतावनी
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी नेतृत्व को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई, तो अमेरिका “वहीं मारेगा जहाँ सबसे ज्यादा दर्द होगा” उन्होंने अमेरिका के ‘लॉक्ड एंड लोडेड’ (तैयार) होने की बात भी कही है।
- सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को विदेशी शक्तियों (विशेषकर अमेरिका) की साजिश बताया है और ट्रम्प को अपने देश पर ध्यान देने की सलाह दी है।
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आर्थिक संकट है मुख्य वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के इस उग्र प्रदर्शन की जड़ में 40% से अधिक की मुद्रास्फीति और ईरानी रियाल की कीमत में आई भारी गिरावट है, जो विरोध प्रदर्शन शुरु में बढ़ती कीमतों के खिलाफ शुरू हुए थे, वे अब सीधे शासन परिवर्तन (Regime Change) की मांग में बदल चुके हैं।
















