
उत्तर प्रदेश अब विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। लखनऊ-कानपुर के बीच बनने वाला नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे राज्य का पहला ऐसा हरित कॉरिडोर बनने जा रहा है, जो केवल गति और कनेक्टिविटी ही नहीं बल्कि प्रकृति से गहरा रिश्ता भी बनाएगा। लगभग 45 किलोमीटर लंबे मार्ग के दोनों ओर 46 हजार से अधिक पेड़ लगाए जाएंगे, जिससे यह रोड यात्रा केवल आरामदायक नहीं बल्कि ताजगी भरी भी होगी।
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हरियाली बढ़ाने की ऐतिहासिक पहल
इस महत्वाकांक्षी हरितीकरण योजना की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और वन विभाग ने मिलकर संभाली है। दोनों विभागों के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके अनुसार पूरी लंबाई पर औसतन प्रति किलोमीटर 1022 पेड़ लगाए जाएंगे। यानी सड़क के हर हिस्से में एक जैसी हरियाली दिखाई देगी। यह संख्या अपने आप में दिखाती है कि सरकार केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यात्रा को पर्यावरण के साथ जोड़ने की सोच रखती है।
वन विभाग को मिली बड़ी जिम्मेदारी
समझौते के तहत केवल पौधरोपण ही नहीं, बल्कि उनकी देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी पूरी तरह वन विभाग को सौंपी गई है। कुल 7 करोड़ रुपये की लागत से चलने वाली इस परियोजना का मकसद केवल सड़क की सुंदरता बढ़ाना नहीं बल्कि एक स्थायी हरित आवरण (permanent green cover) तैयार करना है। यह निवेश उस दिशा में उठाया गया कदम है जहां विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक बनें।
पांच साल तक संभाली जाएगी देखभाल
वन विभाग आने वाले पांच वर्षों तक लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करेगा। इसमें पानी देना, पौधों की सुरक्षा, और उनकी प्राकृतिक वृद्धि सुनिश्चित करना शामिल है। देश में कई बार हरित परियोजनाएं ‘पौधारोपण तक’ सीमित रह जाती हैं, लेकिन इस बार योजना यह सुनिश्चित करती है कि लगाए गए पेड़ जीवित रहें और विकसित हों। इससे यह एक्सप्रेसवे सिर्फ हरियाली का प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी का उदाहरण बनेगा।
देशी और छायादार पेड़ों का चयन
एक्सप्रेसवे के दोनों ओर देशी और छायादार वृक्षों का चयन किया गया है, जिनमें बांस, बरगद, पीपल और पाकड़ जैसे पेड़ शामिल हैं। ये वृक्ष न केवल गर्मी के दिनों में यात्रियों को छाया प्रदान करेंगे, बल्कि वे हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर वातावरण को और शुद्ध बनाएंगे। स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुसार चुने गए ये वृक्ष जैव विविधता (biodiversity) को बढ़ावा देंगे और पक्षियों व छोटे जीवों के लिए नया आश्रय स्थल बनेंगे।
एलिवेटेड सेक्शनों के लिए विशेष तैयारी
जहां एक्सप्रेसवे एलिवेटेड रोड (Elevated Road) के रूप में बनाया जा रहा है, वहां पौधारोपण के लिए अलग व्यवस्था की जा रही है। इन हिस्सों में प्रति किलोमीटर करीब 222 पेड़ लगाए जाएंगे। साथ ही, पौधों को नियमित रूप से पानी मिल सके, इसके लिए बानी से लेकर आज़ाद चौक तक 6 सबमर्सिबल पंप लगाए जाएंगे। यह तकनीकी तैयारी स्पष्ट करती है कि योजना केवल कागजों में नहीं बल्कि जमीन पर हर पहलू को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
पर्यावरण संरक्षण का नया मॉडल
लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों को जोडने वाला मार्ग नहीं रहेगा; यह आने वाले समय में हरित अधोसंरचना का रोल मॉडल बनेगा। इसकी प्रेरणा से देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह के ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने की संभावना बढ़ेगी।
सड़क यात्रा करने वालों के लिए यह मार्ग न केवल तेज गति का अनुभव देगा, बल्कि हरियाली और ठंडक से भरे एक नैसर्गिक सफर का एहसास कराएगा। इस परियोजना से न केवल पर्यावरणीय संतुलन सुधरेगा बल्कि स्थानीय तापमान और धूल प्रदूषण में भी कमी आएगी।
















