
भारत सरकार और TRAI (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण) ने 2026 से सिम कार्ड की बिक्री और उपयोग के नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। इन नए नियमों का मकसद उन बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाना है जो फर्जी या गलत तरीके से लिए गए सिम कार्ड के जरिए किए जाते हैं।
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डिजिटल KYC और बायोमेट्रिक अब हुआ अनिवार्य
2026 से हर नए सिम कार्ड के लिए डिजिटल KYC और आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
अब केवल दस्तावेजों की कॉपी देकर सिम लेना संभव नहीं होगा। ग्राहक की 10 अलग-अलग एंगल से फोटो ली जाएगी ताकि किसी और की पहचान का गलत इस्तेमाल न हो सके। यह सिस्टम फेस रिकग्निशन और AI-आधारित वेरिफिकेशन से जुड़ा होगा, जिससे फर्जी आईडी की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।
यह कदम खासतौर पर उन घटनाओं के बाद उठाया गया है, जहाँ अपराधियों ने दूसरे लोगों की पहचान पर सिम लेकर ऑनलाइन ठगी की थी।
फरवरी 2026 से लागू होगा सिम-बाइंडिंग नियम
इन नए निर्देशों में सबसे दिलचस्प बदलाव है “सिम-बाइंडिंग (SIM Binding) नियम”। इसके तहत फरवरी 2026 से व्हाट्सएप, टेलीग्राम, स्नैपचैट जैसे मैसेजिंग ऐप्स को भी टेलीकॉम नियमों के दायरे में लाया जाएगा।
इसका मतलब यह होगा कि इन ऐप्स का इस्तेमाल तभी हो सकेगा जब एक्टिव सिम उसी डिवाइस में मौजूद हो, जिसमें ऐप लॉग इन किया गया हो— ठीक वैसे ही जैसे बैंकिंग ऐप्स सुरक्षा के लिए OTP और डिवाइस वेरिफिकेशन की मांग करते हैं।
यह कदम सोशल मीडिया के दुरुपयोग और फर्जी प्रोफाइल से होने वाली ठगी को रोकने में मदद करेगा।
एक व्यक्ति पर सिम कार्ड की सीमा तय
TRAI के नए निर्देशों के मुताबिक अब कोई भी व्यक्ति अपनी एक आईडी पर 9 से अधिक सिम कार्ड नहीं रख सकेगा।
हालांकि, उत्तर-पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के लिए अधिकतम सीमा 6 सिम कार्ड तक ही रखी गई है।
अगर कोई कंपनी या व्यक्ति फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर सिम बेचता या जारी करता हुआ पकड़ा जाता है, तो उस पर 50 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना और 3 साल तक की सजा हो सकती है। यह प्रावधान मोबाइल सिम मार्केट में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी कदम माना जा रहा है।
सिम कार्ड खोने या बदलने पर सख्त सुरक्षा
सिम स्वैप या खोए हुए नंबर के मामलों में अब एक नया प्रोटेक्शन टाइम लागू होगा।
नए नियमों के तहत, अगर किसी नंबर का सिम दोबारा जारी किया जाता है, तो अगले 7 दिनों तक उस नंबर की मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (UPC कोड) सुविधा बंद रहेगी।
इससे धोखाधड़ी और मोबाइल नंबर पोर्ट करके बैंकिंग फ्रॉड करने के मामलों को रोका जा सकेगा।
रिचार्ज खत्म होने पर भी सिम 90 दिन तक रहेगा एक्टिव
यूजर्स के हित में सरकार ने एक राहत भरा कदम भी शामिल किया है।
नए नियमों के अनुसार, रिचार्ज खत्म होने के बाद भी सिम कार्ड 90 दिनों तक एक्टिव रहेगा।
अगर किसी नंबर में ₹20 से अधिक बैलेंस बचा है और उपभोक्ता ने रिचार्ज नहीं कराया है, तो टेलीकॉम कंपनी उस बैलेंस में से ₹20 काटकर 30 दिनों की अतिरिक्त वैलिडिटी दे सकेगी।
यह निर्णय विशेष तौर पर ग्रामीण और बुजुर्ग उपभोक्ताओं के हित में लिया गया है, जो अक्सर समय पर रिचार्ज कराना भूल जाते हैं।
TAFCOP और Sanchar Saathi की मदद से करें जांच
भारत सरकार ने मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए दो बेहद उपयोगी पोर्टल भी उपलब्ध कराए हैं:
- TAFCOP Portal (https://tafcop.dgtelecom.gov.in) – यहाँ आप अपने नाम पर चल रहे सभी सिम नंबरों की जांच कर सकते हैं और किसी फर्जी या अनजान सिम को रिपोर्ट कर सकते हैं।
- Sanchar Saathi Portal (https://sancharsaathi.gov.in) – इस प्लेटफॉर्म पर आप चोरी हुए मोबाइल, फर्जी सिम और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
इन प्लेटफॉर्म्स का उद्देश्य उपभोक्ताओं को डिजिटल सशक्तिकरण के साथ साइबर सुरक्षा भी प्रदान करना है।
क्यों जरूरी थे ये सख्त कदम?
फर्जी सिम से जुड़े साइबर क्राइम, वित्तीय ठगी, और धोखाधड़ी के मामलों में पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कई बार अपराधी नकली या किसी और की आईडी का इस्तेमाल करके सिम ले लेते हैं और फिर उसी का इस्तेमाल ऑनलाइन अपराधों में करते हैं।
TRAI और गृह मंत्रालय ने मिलकर यह फैसला इसलिए लिया है ताकि हर मोबाइल कनेक्शन की जिम्मेदारी उस व्यक्ति तक सीमित रहे जिसने सिम खरीदी है।
















