उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच संपर्क को नई दिशा देने वाला गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे अब कुशीनगर जिले तक बढ़ाया जाएगा। इस विस्तार के बाद यह एक्सप्रेसवे न केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश को पश्चिमी हिस्से से जोड़ेगा, बल्कि राज्य की सीमाओं से आगे बढ़कर सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से भी जुड़ जाएगा। इस कनेक्शन के पूरा होने पर सिलीगुड़ी से पानीपत तक सीधा फोरलेन मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे यात्रा और व्यापार दोनों अधिक आसान बनेंगे।

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750 किलोमीटर लंबा नेटवर्क तैयार होगा
नए विस्तार योजना के बाद इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 750 किलोमीटर तक हो जाएगी। पहले इसका निर्माण गोरखपुर से शामली तक किया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे पानीपत तक बढ़ा दिया गया है और कुशीनगर में लगभग तीन से चार किलोमीटर तक और विस्तार दिया जा रहा है। इस हिस्से से इसे सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, फरवरी तक एलाइनमेंट का कार्य पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद विस्तृत डिजाइन तैयार होगा।
पूर्वांचल से पश्चिम तक बनेगा नया आर्थिक गलियारा
इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने से पूर्वांचल और पश्चिम के बीच यात्रा का समय काफी घट जाएगा। अब तक पूर्वी जिलों से हरियाणा या दिल्ली तक पहुंचने में लंबा समय लगता है, लेकिन इस हाइवे के बनने के बाद यह सफर बहुत सुगम होगा। उद्योग, पर्यटन और कृषि उत्पादों के परिवहन में सुविधा बढ़ेगी। खास बात यह है कि यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल को न केवल लखनऊ और मेरठ से जोड़ेगा बल्कि हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों तक भी सीधा संपर्क मुहैया कराएगा।
ग्रीनफील्ड मॉडल पर होगा निर्माण
गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे को ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका मतलब है कि यह पूरी तरह नया मार्ग होगा, जिससे पुराने रूट्स पर बोझ नहीं पड़ेगा। निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई न्यूनतम रखी जाएगी और पर्यावरणीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कुशीनगर जिले में यह एक्सप्रेसवे लगभग 21 गाँवों से होकर गुजरेगा जबकि गोरखपुर में लगभग 46 गाँव इसके दायरे में आएंगे। अधिकारियों का अनुमान है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी और वर्ष 2026 में निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
इन जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे
यह विशाल परियोजना उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुल 22 जिलों को आपस में जोड़ेगी। इनमें कुशीनगर, गोरखपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, बरेली, संभल, अमरोहा, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, मुज़फ्फरनगर, शामली और पानीपत शामिल हैं। इस पूरी श्रृंखला के माध्यम से राज्य का सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क तैयार होगा, जो उत्तर भारत के प्रमुख आर्थिक गलियारों में एक बन सकता है।
कुशीनगर के गांव भी होंगे कनेक्ट
कुशीनगर के कई गांव सीधे इस एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे, जिससे ग्रामीण इलाकों में आवागमन आसान होगा। इनमें रामपुर, होलिया, सिंदुरिया, खुरहुरिया, बलुआ, सहजौली, बेलवा खुर्द और महुअवा जैसे गांव शामिल हैं। इस नए मार्ग के बनने से क्षेत्र में भूमि की कीमतों में वृद्धि होने के साथ-साथ छोटे व्यापारियों और किसानों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
सड़क की चौड़ाई और तकनीकी विशेषताएं
एक्सप्रेसवे का अधिकांश हिस्सा फोरलेन होगा जिसकी चौड़ाई स्थान के अनुसार 60 से 70 मीटर रखी जाएगी। सड़क के दोनों किनारों पर सर्विस लेन, अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए जाएंगे ताकि यातायात का प्रवाह सुचारू रहे। भविष्य में मांग के अनुसार इसे सिक्स लेन में अपग्रेड करने की संभावना भी रखी गई है।
विकास व निवेश को नई गति मिलेगी
परियोजना के पूरा होने के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को गति मिलने की उम्मीद है। यह सड़क केवल परिवहन का माध्यम नहीं बल्कि विकास की धुरी साबित होगी। व्यापारिक गतिविधियों के बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और लॉजिस्टिक्स से जुड़े उद्योगों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे का कुशीनगर तक विस्तार न केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में अहम कदम है, बल्कि यह उस नए भारत की झलक है जो तेज़ी से प्रगति की राह पर आगे बढ़ रहा है। यह एक्सप्रेसवे पूर्व और पश्चिम के बीच दूरी घटाने के साथ-साथ देश की आर्थिक एकता का प्रतीक भी बनेगा।
















