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अब कोटे वालों को नहीं मिलेगी जनरल की सीट! सुप्रीम कोर्ट का आरक्षण के नियमों पर सबसे बड़ा फैसला

जनरल कैटेगरी, मेरिट और रिजर्वेशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या साफ किया है? यह फैसला सरकारी नौकरी से लेकर IIT-JEE, NEET तक किसे फायदा और किसे झटका देगा पूरी सच्चाई जानने के लिए आगे पढ़ें।

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अब कोटे वालों को नहीं मिलेगी जनरल की सीट! सुप्रीम कोर्ट का आरक्षण के नियमों पर सबसे बड़ा फैसला
अब कोटे वालों को नहीं मिलेगी जनरल की सीट! सुप्रीम कोर्ट का आरक्षण के नियमों पर सबसे बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आरक्षण (Reservation) व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बेहद अहम और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि ओपन या जनरल कैटेगरी (General Category) कोई आरक्षित कोटा नहीं होती, बल्कि यह सभी उम्मीदवारों के लिए खुली होती है, चाहे वे किसी भी जाति या वर्ग से आते हों। इस फैसले का असर सरकारी नौकरी (Government Job) से लेकर एडमिशन (Admission) तक की पूरी चयन प्रक्रिया पर पड़ेगा।

यह फैसला उन हजारों मेधावी युवाओं के लिए राहत बनकर आया है, जिन्हें केवल इस वजह से बाहर कर दिया गया था कि वे आरक्षित वर्ग (Reserved Category) से थे, जबकि उनके अंक जनरल कट-ऑफ (General Cut-off) से अधिक थे।

किस बेंच ने सुनाया फैसला?

यह फैसला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनाया। बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन और रजिस्ट्रार द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए 18 सितंबर 2023 के राजस्थान हाईकोर्ट डिवीजन बेंच के फैसले को बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि मेरिट किसी उम्मीदवार के लिए सजा नहीं बन सकती और आरक्षण का उद्देश्य समावेशन (Inclusion) होना चाहिए, न कि प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाना।

क्या था पूरा मामला?

मामला अगस्त 2022 में निकली जूनियर जुडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। इस भर्ती के जरिए:

  • राजस्थान हाईकोर्ट
  • अधीनस्थ न्यायालय
  • संबद्ध न्यायिक संस्थानों

में कुल 2,756 पद भरे जाने थे।

चयन प्रक्रिया

  • लिखित परीक्षा: 300 अंक
  • टाइपिंग टेस्ट: 100 अंक
  • नियम: हर कैटेगरी में खाली पदों से पांच गुना उम्मीदवार लिखित परीक्षा के आधार पर टाइपिंग टेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट किए जाने थे।

रिजल्ट के बाद उठा विवाद

इस भर्ती का परिणाम मई 2023 में घोषित हुआ। रिजल्ट सामने आते ही बड़ा विरोधाभास दिखा—

  • SC, OBC, MBC और EWS जैसी आरक्षित कैटेगरी की कट-ऑफ
  • जनरल कैटेगरी से ज्यादा चली गई

उदाहरण के तौर पर:

  • जनरल कट-ऑफ: 196 अंक
  • कई आरक्षित कैटेगरी की कट-ऑफ: 220 अंक से अधिक

इसका नतीजा यह हुआ कि आरक्षित वर्ग के कई उम्मीदवार, जिन्होंने 196 से ज्यादा अंक हासिल किए थे, लेकिन अपनी कैटेगरी की कट-ऑफ पार नहीं कर सके, उन्हें शॉर्टलिस्टिंग से बाहर कर दिया गया

हाईकोर्ट का अहम फैसला

इस फैसले को चुनौती देते हुए उम्मीदवार राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचे। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया—

  • सबसे पहले पूरी तरह मेरिट के आधार पर ओपन/जनरल लिस्ट तैयार होगी
  • अगर कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जनरल कट-ऑफ से ज्यादा अंक लाता है, तो उसे ओपन कैटेगरी में माना जाएगा
  • ऐसे उम्मीदवारों को बाद में रिजर्व लिस्ट में दोबारा शामिल नहीं किया जाएगा

हाईकोर्ट ने इंद्रा साहनी केस और आर.के. सरबवाल केस का हवाला देते हुए कहा कि किसी उम्मीदवार को केवल उसकी जाति या वर्ग के आधार पर ओपन सीट से बाहर नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट की मुहर

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इसी तर्क से सहमति जताई। कोर्ट ने कहा—

  • कोई भी भर्ती एजेंसी (Recruitment Authority)
  • किसी उम्मीदवार को सिर्फ इसलिए
  • ओपन कैटेगरी की पोस्ट से बाहर नहीं कर सकती
  • क्योंकि वह रिजर्व कैटेगरी से आता है

अगर उम्मीदवार ने जनरल कट-ऑफ से ज्यादा अंक हासिल किए हैं।

कोर्ट के अनुसार, ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (Article 14 & 16) के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए—

  1. पहले पूरी मेरिट के आधार पर ओपन लिस्ट बनेगी
  2. इसमें वे सभी उम्मीदवार शामिल होंगे, जिन्होंने जनरल कट-ऑफ क्लियर किया है
  3. इसके बाद ही बची हुई सीटों पर आरक्षित कैटेगरी की लिस्ट तैयार होगी
  4. मेरिट को दंड नहीं बनाया जा सकता

क्या यह नियम एडमिशन पर भी लागू होगा?

हां। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह सिद्धांत केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है।

  • IIT-JEE, NEET, जैसे एंट्रेंस एग्जाम
  • कॉलेज और यूनिवर्सिटी एडमिशन

पर भी यही नियम लागू होगा।

शर्त क्या है?

अगर किसी आरक्षित वर्ग के स्टूडेंट ने:

  • उम्र में छूट
  • फीस में छूट
  • फिजिकल स्टैंडर्ड में रियायत

जैसी कोई सुविधा ली है, तो वह जनरल सीट पर दावा नहीं कर सकता, भले ही उसके अंक जनरल कट-ऑफ से ज्यादा हों

क्यों है यह फैसला ऐतिहासिक?

यह फैसला देश की भर्ती और एडमिशन प्रणाली में ट्रांसपेरेंसी और फेयरनेस को मजबूत करता है। यह साफ करता है कि—

  • जनरल कैटेगरी कोई बंद कोटा नहीं
  • मेरिट सबके लिए बराबर
  • आरक्षण का उद्देश्य अवसर देना है, अवसर छीनना नहीं

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