
भारत में नल का पानी पीने से पहले लोग दो बार सोचते हैं। कोई उसे उबालता है, कोई फिल्टर करता है, तो कोई सीधे बाजार से बोतलबंद पानी खरीदता है। वजह साफ है, दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। लेकिन इस आम धारणा के बीच एक भारतीय शहर ऐसा है, जिसने पानी की इस आदत और डर दोनों को बदल दिया है ओडिशा का पवित्र शहर पुरी।
यहां के लोग अब बिना किसी RO या बोतल खोले, नल से सीधे पानी पीते हैं। और सबसे खास बात, इस पानी की गुणवत्ता किसी प्रीमियम मिनरल वाटर से कम नहीं।
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‘सुजल’ मिशन ने बदल दी तस्वीर
पुरी की यह कामयाबी संयोग नहीं, बल्कि सुविचारित योजना और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का परिणाम है। ओडिशा सरकार की ‘सुजल – ड्रिंक फ्रॉम टैप (DFT)’ योजना ने शहर को देश का पहला ऐसा स्थान बना दिया, जहां हर घर के नल से मिल रहा पानी भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) दोनों के मानकों पर खरा उतरता है।
करीब 25 हजार से ज्यादा घर इस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, जहां 24 घंटे लगातार साफ, स्वादिष्ट और सुरक्षित पानी की सप्लाई होती है। यह व्यवस्था किसी लग्ज़री की तरह नहीं, बल्कि नागरिक अधिकार के रूप में स्थापित की गई है।
आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ जल नेटवर्क
पुरी में सप्लाई होने वाले पानी को ‘मिनरल क्वालिटी’ बनाना आसान नहीं था। इसके लिए शहर में अत्याधुनिक जल शुद्धिकरण प्रणाली स्थापित की गई। पानी को पहले गाद और अशुद्धियों से मुक्त किया जाता है, फिर कई चरणों में उसका फिल्ट्रेशन, क्लोरीनीकरण और ओजोनीकरण किया जाता है।
इन प्रक्रियाओं के दौरान पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और भारी धातुएं पूरी तरह समाप्त हो जाती हैं। इतना ही नहीं, उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियंत्रित मात्रा में क्लोरीन मिलाई जाती है ताकि स्वाद भी बरकरार रहे और सुरक्षा भी बनी रहे।
बदली पाइपलाइनें और रियल-टाइम मॉनिटरिंग
पुरी में पानी सिर्फ फिल्टर होकर नहीं, बल्कि स्मार्ट सिस्टम से बहता है। पुराने, जंग लगे पाइप हटाकर उनकी जगह फूड-ग्रेड हाई-प्रेशर पाइप लगाए गए हैं, जिनमें से बाहर की गंदगी प्रवेश नहीं कर सकती। सप्लाई लाइन पर लगाए गए सेंसर लगातार पानी की गुणवत्ता पर नजर रखते हैं। किसी भी असामान्यता के संकेत मिलते ही सिस्टम स्वतः सप्लाई रोक देता है।
इसके साथ ही, हर दिन प्रयोगशालाओं में रैंडम सैंपल जांचे जाते हैं ताकि नागरिकों को हर बूंद भरोसेमंद और शुद्ध पानी मिले।
लोगों की आदतें भी बदल गईं
पुरी में अब RO मशीनों और बोतलबंद पानी की मांग लगभग गायब सी हो गई है। घर-घर में भरोसे के साथ नल से सीधे गिलास भरकर पानी पिया जा रहा है। शहर के लोगों का कहना है कि अब उन्हें पानी उबालने या फिल्टर के खर्च से छुटकारा मिला है। इससे एक तरफ पानी की बर्बादी कम हुई है, वहीं बिजली की खपत भी घटी है। सबसे बड़ा लाभ स्वास्थ्य के मामले में देखने को मिला है, पानी से होने वाली बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है।
अब देशभर में आदर्श बन रहा पुरी मॉडल
पुरी की सफलता ने अब एक नई लहर शुरू की है। ओडिशा सरकार ने इस मॉडल को भुवनेश्वर, कटक और अन्य शहरों में लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यही मॉडल अन्य राज्यों ने भी अपनाया, तो भारत में “ड्रिंक फ्रॉम टैप” जल्द ही सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन सकता है।
पुरी ने यह दिखा दिया है कि स्वच्छ पानी केवल अमीरों की पहुंच तक सीमित नहीं होना चाहिए। जब तकनीक, पारदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति साथ चलें, तो हर घर का नल एक भरोसेमंद स्रोत बन सकता है।
















