शिक्षा का अधिकार योजना में बड़ा बदलाव आया है। अब प्राइवेट स्कूलों में कमजोर वर्ग के बच्चों को केवल कक्षा 1 से ही मुफ्त एडमिशन मिलेगा। नर्सरी या KG स्तर पर यह सुविधा बंद हो गई है, जिससे अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।

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बदलाव क्यों जरूरी?
सरकार ने शिक्षा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए यह कदम उठाया। पहले विभिन्न स्तरों पर दाखिला होता था, जिससे भ्रम रहता था। अब एक ही स्तर पर लॉटरी सिस्टम से चयन होगा। इससे स्कूलों को भी प्रबंधन आसान हो जाएगा। यह नीति नए शिक्षा नीति के अनुरूप है।
कौन से स्कूल प्रभावित?
सभी गैर-सहायता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों पर यह नियम लागू होगा। माइनॉरिटी संस्थानों को इससे छूट मिली रहेगी। छोटे स्कूलों को राहत मिलेगी क्योंकि बोझ कम होगा। बड़े शहरों में ज्यादा असर दिखेगा।
लाभार्थी कैसे बदलेंगे?
गरीब परिवारों के बच्चे, जिनकी आय सीमा कम है, अब कक्षा 1 तक इंतजार करेंगे। SC-ST और OBC वर्ग को प्राथमिकता बनी रहेगी। उम्र सीमा सख्त होगी – कक्षा 1 के लिए कम से कम 5-6 वर्ष। अनाथ और दिव्यांग बच्चों को अतिरिक्त मौका मिलेगा।
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आवेदन कैसे करें?
राज्य के RTE पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें। आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण और आधार कार्ड अपलोड करें। पांच स्कूल चुनें और फॉर्म सबमिट करें। लॉटरी के बाद दाखिला मिलेगा। समय पर अपडेट चेक करते रहें।
अभिभावकों के लिए टिप्स
दस्तावेज पहले से तैयार रखें। उम्र का सही प्रमाण लें। सरकारी स्कूलों के विकल्प भी देखें। विरोध प्रदर्शनों पर नजर रखें क्योंकि अदालत में मामला चल सकता है। बच्चों की तैयारी अभी से शुरू करें।
संभावित चुनौतियां
नर्सरी स्तर पर गरीब बच्चे पिछड़ सकते हैं। रीइंबर्समेंट में देरी की समस्या बनी रहेगी। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कम है। फिर भी, यह बदलाव लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है।
















