सुजलॉन एनर्जी का शेयर बाजार में इस समय एक रोचक मोड़ पर खड़ा है। पिछले कुछ महीनों से इसमें गिरावट का दौर चल रहा है, लेकिन कंपनी की बुनियादी ताकत इसे लंबी दौड़ के लिए आकर्षक बनाए रखती है। निवेशक इस स्टॉक पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की बढ़ती डिमांड इसमें नई ऊर्जा भर सकती है।

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हालिया प्राइस परफॉर्मेंस
सुजलॉन एनर्जी के शेयर हाल ही में 52 रुपये के आसपास मंडरा रहे हैं। मई 2025 में जहां यह 74 रुपये के ऊंचे स्तर पर पहुंचा था, वहीं अब यह उससे लगभग 30 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहा है। पिछले छह महीनों में 22 प्रतिशत और एक साल में 19 प्रतिशत की गिरावट ने इसे शॉर्ट टर्म करेक्शन फेज में ला खड़ा किया है। फिर भी, बाजार की उतारचढ़ाव के बीच यह स्टॉक स्थिरता की तलाश में है।
टेक्निकल विश्लेषण, कमजोरी के संकेत
तकनीकी चार्ट्स सुजलॉन के शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म ट्रेंड दोनों को कमजोर दिखाते हैं। शेयर 5, 10, 20, 50, 100 और 200 दिन की सभी मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है। 50 रुपये से 51 रुपये का जोन मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है, जबकि 54 रुपये पर रेजिस्टेंस नजर आता है। अगर यह 54 रुपये को पार कर जाता है, तो 56 रुपये तक की तेजी देखने को मिल सकती है। ट्रेडर्स के लिए 50-55 रुपये की रेंज महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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मजबूत फंडामेंटल्स, ऑर्डर बुक की ताकत
कीमतों में दबाव के बावजूद सुजलॉन के फंडामेंटल्स ठोस हैं। दिसंबर 2025 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 6.2 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष के अंत के 5.6 गीगावॉट से अधिक है। यह भविष्य के बिजनेस को मजबूत आधार देता है। रिन्यूएबल एनर्जी की मांग बढ़ने से कंपनी को फायदा होगा, खासकर विंड और सोलर प्रोजेक्ट्स में।
एक्सपर्ट्स की राय और टारगेट
ब्रोकरेज फर्म्स सुजलॉन पर सकारात्मक हैं। कई ने इसे खरीदने की सलाह दी है, साथ ही 70 से 82 रुपये तक के टारगेट बताए हैं। कुछ का मानना है कि करेक्शन के बाद कंसोलिडेशन फेज में स्टॉक 58-60 रुपये तक जा सकता है। गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाने वालों के लिए 48 रुपये के नीचे सख्त स्टॉप लॉस जरूरी है। होल्ड करने की सलाह वाले भी 60 रुपये का लक्ष्य देख रहे हैं।
कंपनी का बिजनेस मॉडल
सुजलॉन एनर्जी विंड टरबाइन निर्माण में अग्रणी है और सोलर एनर्जी सॉल्यूशंस भी प्रदान करती है। इसके सर्विसेज में साइट असेसमेंट, जमीन अधिग्रहण, इंस्टॉलेशन, कमीशनिंग और एसेट मैनेजमेंट शामिल हैं। भारत के नेट जीरो लक्ष्य के साथ रिन्यूएबल सेक्टर की ग्रोथ इसे फायदा पहुंचाएगी।
कुल मिलाकर, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स सतर्क रहें, जबकि लॉन्ग टर्म निवेशक ऑर्डर बुक और सेक्टर थीम पर भरोसा कर सकते हैं। बाजार की चाल पर नजर रखें।
















